• 2) JHIJHIYA FOLK DANCE OF BIHAR  : Jhijhiya is a cultural dance from the Mithila region of Bihar and the Madhesh of Nepal. Jhijhiya is mostly played at time of Dusshera, in dedication to Durga Bhairavi, the goddess of victory.While dancing jhijhiya, women put a soil pot on their head and they balance it and then dance.

  • 3) जाट-जाटटन नृत्य एक दृष्टि में  : जाट-जाटटन उत्तरी वबहार का सबसे प्रवसद्ध और प्रचवलत लोक नृत्य है | कोिी और वमविला क्षेत्र में इसकी ववविि ख्यावत है |यह नृत्य एक ककवदंवत किा पर आधाटरत है | कहते हैं कक, एक जाट-जाटटन िे, जो एक-दूसरे से अत्यंत प्रेम करते िे, सच्चा, हार्दयक और आनुभूवतक | परन्तु तिाकवित सामावजक वसद्धांतों ने उन्हें अलग कर कदया | वे एक दूसरे से दूर हो कर, अत्यंत ववपरीत पटरवस्िवतयों में, बेहद दुुःख में, वंचना में ककसी तरह वजए | इस नृत्य का मूल आधार उनके पववत्र प्रेम की स्मृवत को प्रस्तुत करना तिा व्याख्यावयत करना है | मूलतुः जोड़े में ककया जाने वाला यह नृत्य जाट-जाटटन के उसी प्रेम कक कलात्मक प्रस्तुवत है , उन्हें श्रद्धांजवल है | प्रारंभ में यह नृत्य इस प्रेम की कलात्मक प्रस्तुवत ही िी | बाद में यह सामावजक समस्याओं से भी जुड़ता गया | सूखा, बाढ़, गरीबी, प्रेम, दुुःख, पवत-पत्नी/प्रेमी-प्रेवमका की आपसी बात-चीत, तू-तू-मैं-मैं आकद सामावजक पटरवस्िवतयााँ और प्राकृवतक आपदाएं इस नृत्य को ववस्तार देती गई |जाट-जाटटन उत्तरी वबहार का सबसे प्रवसद्ध और प्रचवलत लोक नृत्य है | कोिी और वमविला क्षेत्र में इसकी ववविि ख्यावत है |यह नृत्य एक ककवदंवत किा पर आधाटरत है | कहते हैं कक, एक जाट-जाटटन िे, जो एक-दूसरे से अत्यंत प्रेम करते िे, सच्चा, हार्दयक और आनुभूवतक | परन्तु तिाकवित सामावजक वसद्धांतों ने उन्हें अलग कर कदया | वे एक दूसरे से दूर हो कर, अत्यंत ववपरीत पटरवस्िवतयों में, बेहद दुुःख में, वंचना में ककसी तरह वजए | इस नृत्य का मूल आधार उनके पववत्र प्रेम की स्मृवत को प्रस्तुत करना तिा व्याख्यावयत करना है | मूलतुः जोड़े में ककया जाने वाला यह नृत्य जाट-जाटटन के उसी प्रेम कक कलात्मक प्रस्तुवत है , उन्हें श्रद्धांजवल है | प्रारंभ में यह नृत्य इस प्रेम की कलात्मक प्रस्तुवत ही िी | बाद में यह सामावजक समस्याओं से भी जुड़ता गया | सूखा, बाढ़, गरीबी, प्रेम, दुुःख, पवत-पत्नी/प्रेमी-प्रेवमका की आपसी बात-चीत, तू-तू-मैं-मैं आकद सामावजक पटरवस्िवतयााँ और प्राकृवतक आपदाएं इस नृत्य को ववस्तार देती गई |

  • 6) Raai Dance  : The Bundelkhand region of Madhya Pradesh is rich in folklore and tradition. Inhabited by numerous tribes, each with their own varied culture and customs, the region has much to showcase in terms of dance and music. Among the many folk arts that thrive here is the Raai dance of the Bediya tribe. This is a tribe that has faced much ignominy because of a tradition of prostitution that thrives within it. Although prostitution is not as commonly practiced now as it was in the past, the tribe still has to come out of the notoriety that surrounds it. The govt. too has made many efforts towards relieving women of this community from the shackles of the past.The folk dance of this Bediya tribe which is known as ‘Raai’ is an intrinsic part of its heritage and present day identity.Through the centuries Raai has been the folk dance which has touched its peak as a classical dance. Later Raai had degenerated its aesthetical values and lost its classical expressions. Today it remains simply as a folk dance. Raai means a mustard seed. When a mustard seed is thrown into a saucer, the seed starts to swings around. The way mustard seed moves in the saucer, the dancers also swings and when the singers sing the lyrics of the song the dancers follow the beats with foot steps. It is a duet and the competition is between the beats of the drum and foot steps of the dancer. The drummer and the dancer try to win each other and this competition leads towards the bliss.

  • 7) चकमा और चेर नृत्य  : पारम्परिक चकमा लोक नृत्य जो मिजोरम राज्य के परम्परित लोक नृत्य की विधि है, जवाहर नवोदय के छात्राओं द्वारा इसका पूर्ण भावभंगिमा युक्त प्रस्तुतीकरण किया गया |